अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम

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प्रधानमंत्री ने पढ़ा शेर-
न मांझी न रहबर न हक में हवाएं
कश्ती है जर्जर ये कैसा सफर है
नई दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को लोकसभा में औंधे मुंह गिर गया। 12 घंटे लगातार चली मैराथन बहस के बाद देर रात हुई वोटिंग में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में केवल 126 सदस्यों का ही समर्थन मिला। जबकि प्रस्ताव का विरोध करते हुए 325 सदस्यों ने सरकार पर विश्वास जताया। कुछ दिन पहले तक एनडीए की सहयोगी रही तेलगू देसम पार्टी द्वारा केन्द्र सरकार के खिलाफ लाये गये इस पहले अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष की रणनीति पूरी तरह धराशायी हो गयी। सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने अचानक रुख बदलते हुए खुद को मतदान से अलग रखा। बिजू जनता दल ने भी शिवसेना का साथ दिया। अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 451 सदस्यों ने मतदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लिया और कहा कि सवा सौ करोड़ लोगों का आशीर्वाद हमारे साथ है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि हम प्रार्थना करते हैं कि विपक्ष को 2024 में भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की शक्ति मिले। उन्होंने शेर पढ़ा –
न मांझी न रहबर न हक में हवाएं
कश्ती है जर्जर ये कैसा सफर है
पीएम नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में जवाब देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। पीएम ने विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का चुन-चुनकर जवाब दिया। पीएम मोदी ने राहुल गांधी की ‘झप्पीÓ पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को खुदपर भरोसा ही नहीं है। कांग्रेस को अहंकारी बताते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस के लोग जो भाषा बोल रहे हैं वह अज्ञानवश और अति आत्मविश्वास के कारण है। महागठबंधन पर तंज कसते हुए पीएम ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव नहीं बल्कि यह कांग्रेस के तथाकथित साथियों का फ्लोर टेस्ट है। मैं पीएम बनूंगा इसका ट्रायल चल रहा है। पीएम ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी जय-पराजय का फैसला भी नहीं हुआ था लेकिन उनको (राहुल) यहां पहुंचने की जल्दी थी। वह मुझे उठाने की कोशिश कर रहे थे, उठो-उठो। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि न कोई मुझे यहां से उठा सकता है और न बिठा सकता है। देश की 125 करोड़ देशवासी का मुझमें भरोसा है और उन्होंने ही मुझे यहां बिठाया है। पीएम ने कहा, इतनी जल्दीबाजी क्या है। यह अहंकार ही है। वह कहते थे कि हम खड़े होंगे तो पीएम 15 मिनट तक भी खड़े नहीं हो पाएंगे। मैं अभी खड़ा भी हूं और चार साल में जो काम किए हैं उसपर अड़ा भी हूं। पीएम यही नहीं रुके और राहुल पर फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा, हमारी सोच उनसे अलग है। डंके की चोट पर की गई बात अहंकार कहलाता है। वह कहते हैं कि 2019 में पावर में आने नहीं देंगे। जो लोगों में विश्वास नहीं करते और खुद को ही भाग्य विधाता मानते हैं और उनके मुंह से ऐसे शब्द निकलते हैं। पीएम ने कहा कि लोकतंत्र में जनता जर्नादन भाग्य विधाता है। पर 2019 में कांग्रेस बड़ा दल बनेगी तो मैं पीएम बनूंगा। यह बयान अहंकार को दर्शाता है। दरअसल, यह अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि कांग्रेस और उनके साथियों का फ्लोर टेस्ट है। दूसरों की भी ढेर सारी ख्वाहिश है, उनका क्या होगा। इस बारे में कन्फ्यूजन है। यह सरकार का नहीं फ्लोर टेस्ट नहीं है। इस प्रस्ताव के बहाने कुनबे को जमाने की कोशिश हो रही है। एक मोदी को हटाने के लिए कई लोग एकत्र हो गए हैं। पीएम ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा, ये अविश्वास से घिरे हुए हैं। यही उनकी पूरी कार्यशैली का हिस्सा है। स्वच्छ भारत, योग दिवस, देश के मुख्य न्यायाधीश, आरबीआई, अर्थव्यवस्था के आंकड़े देने वाली संस्थाएं, चुनाव आयोग, ईवीएम पर इनको विश्वास नहीं है। क्योंकि कांग्रेस को अपने पर विश्वास नहीं है। कुछ लोग मु_ीभर अपना ही विशेष अधिकार मानकर बैठते थे। भ्रष्टाचार पर चोट से उनकी बेचैनी बढ़ गई। कोर्ट-कचहरी में उनको पेश होना पड़ा तो उनको भी तकलीफ होने लगी। राहुल गांधी द्वारा डोकलाम पर उठाए गए सवाल पर पीएम ने कहा, मैं मानता हूं जिस विषय की जानकारी नहीं है उसपर बोलने से बात जरा उल्टी पड़ जाती है। देश का ज्यादा नुकसान ज्यादा हो जाता है। बचना चाहिए। डोकलाम पर जब सरकार देश आगे बढ़ रही थी तब चीन के राजदूत के साथ कौन बैठ थे। बाद में कभी हां कभी ना, कोई कहता था मिले, नहीं मिले। क्या हर जगह बचपाना हरकत करते रहे। राफेल डील में राहुल गांधी के घपले के आरोप पर पीएम ने कहा, मैं कल्पना नहीं कर सकता हूं कि सत्य को इस प्रकार से कुचला जाता है। बार-बार चीखकर देश को गुमराह करने का काम किया जाता है। देश के सुरक्षा से जुड़े विषयों पर इस प्रकार से खेल खेले जाते हैं। देश कभी आपको माफ नहीं करेगा। सदन में लगे आरोप पर दोनों देश को बयान जारी करना पड़ा। दोनों देश को खंडन जारी करना पड़ा। जो लोग इतने साल सत्ता में रहे, बिना किसी सबूत के चीखते रहे। सत्य का गला घोंटने की कोशिश है, देश की जनता इसे जानती है। हर बार जनता ने आपको जवाब दी है। देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि यह समझौता दो देशों के बीच हुआ है। पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर इन बचकाना बयानों से बचा जाए। यह मेरा आग्रह है। नामदार के आगे मैं प्रार्थना ही कर सकता हूं। पीएम ने कहा कि देश के सेनाध्यक्ष के लिए किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जाता है। देश का हर सिपाही, जो सीमा पर होगा उसे गहरी चोट पहुंची होगी। सर्जिकल स्ट्राइक को जुमला स्ट्राइक बोलने पर यह देश कभी माफ नहीं करेगा। आपकी गाली सुनने को लिए मैं तैयार हूं, देश के जवान को गाली मत दीजिए। सेना को अपमानित निरंतर चलता है। पीएम ने राहुल के साथ यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी पर भी बिना नाम लिए हमला बोला। उन्होने कहा, पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा अविश्वास कांग्रेस की फितरत है। कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का दुरुपयोग किया है। मैंने अखबारों में पढ़ा कि कौन कहता है कि हमारे नंबर नहीं है। यह अहंकार देखिए, 1999 में खड़े होकर दावा किया गया था । 272 की संख्या है और हमारे साथ और भी जुडऩे वाले हैं और अटल जी की सरकार को सिर्फ एक वोट से गिरा दिया था। 272 का जो दावा किया था वह खोखला निकला, देश पर चुनाव थोपे गए। स्थिर जनादेश को अस्थिर करने के लिए खेल खेले जा रहे हैं। वोट के बदले नोट यह खेल कौन नहीं जानता है। बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव पर सोनिया गांधी ने कहा था कि कौन कहता है कि हमारे पास नंबर नहीं हैं। पीएम ने राहुल के आंख में आंख में बयान पर कहा, ‘सही है, हम कौन होते हैं जो आपकी आंख में आंख डाल सके, गरीब मां का बेटा, पिछड़ी जाति में पैदा हुआ, आप नामदार हैं, हम कामगार है। आपकी आंख में आंख डालने की हिम्मत मुझमें नहीं है। सुभाष चंद्र बोस ने कभी आंख में आंख डालने की कोशिश की क्या किया गया उनके साथ। मोराराजी देसाई, जयप्रकाश नारायण के साथ क्या किया गया? सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ क्या किया गया? पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व पीएम चंद्रशेखर के साथ क्या किया गया? कैसे अपमानित किया जाता था। कैसे लोगों को ठोकर मारकर निकाला जाता है। एक परिवार का इतिहास सबके सामने है। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर अपना भाषण पूरा करने के बाद राहुल गांधी के आंख मारने की हरकत पर भी पीएम ने तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘आंख की हरकत को पूरा देश देख रहा था। आंखों की बात करने वालों की आंखों की हरकतें, आंख मार रहे थे। आंख में आंख डालकर आज सत्य को कुचला गया। पीएम ने चौकीदार और भागीदार पर भी बोला। उन्होंने कहा, ‘हम चौकीदार भी हैं हम भागीदार भी हैं लेकिन हम आपकी तरह सौदागर नहीं हैं। ठेकेदार नहीं हैं। देश के किसानों के विकास के भागीदार हूं। हम देश को विकास देने का भागीदार हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेट के दर्जे पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘जोर और जुल्म के बीच आंध्र और तेलंगाना का विभाजन किया। उस समय मैंने यह कहा था कि तेलुगू हमारी मां है। तेलुगू के स्प्रिट को टूटने नहीं देना चाहिए। कांग्रेस की वजह से तेलंगाना विवाद पैदा हुआ। कांग्रेस ने भारत-पाकिस्तान का विभाजन किया और आज भी हम मुसीबत झेल रहे हैं। कांग्रेस विभाजन करके आंध्र जीतना चाहती थी लेकिन आंध्र भी न मिला और तेलंगाना भी नहीं मिला। आंध्र का बंटवारा जबरन किया गया। संसाधनों का विवाद आज भी चल रहा है। आंध्र और तेलंगाना के विकास में कोई कमी नहीं आएगी। एक माननीय ने कहा था कि स्पेशल कैटिगरी से कहीं ज्यादा अच्छा स्पेशल पैकेज है। एनडीए सरकार आंध्र के लोगों की आशा और आकांक्षाओं का मान रखती है। सरकार 14वीं वित्त आयोग की सिफारिशों से बंधी हुई है। नया स्पेशल असिस्टेंट पैकेज बनाया गया। यह तय किया गया कि आंध्र को उनती वित्तीय सहायता मिले जितनी उसे स्पेशल स्टेटस कैटिगरी से मिलती है। इसे 2016 को लागू किया गया। आंध्र के सीएम ने खुद इसे स्वीकार करते हुए केंद्र का धन्यवाद किया। टीडीपी ने अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए यू टर्न किया और एनडीए छोडऩे का फैसला किया था। एनडीए छोड़ते वक्त मैंने चंद्रबाबू नायडू को फोन किया था और मैंने कहा था कि चंद्रबाबू आप वाईएसआर के चक्र में फंस रहे हैं। आप किसी हालत में बच नहीं पाओगे। झगड़ा उनका वहां का है उपयोग सदन का किया जा रहा है। आंध्र की जनता इसे देख रही है।

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