बढ़ते बलात्कार व हैवानियत को रोकने के लिए भारत में क़ानून सख्त क्यों नही

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आफाक अहमद मंसूरी

ADVT

लखनऊ | वर्तमान समय में भारत के कठुवा गैंग रेप का मामला सुर्खियों में हैं हर किसी की जुबान पर यही बात है कि आखिर ये हैवानियत का खेल कब रुकेगा ये सोंचकर ही शरीर कॉप जाता है कि कैसे कोई इंसान किसी छोटी बच्ची के साथ हैवानियत और दरिंदगी से बलात्कार कर सकता है, पुलिस की चार्जसीट के मुताबिक़ जम्मू के जिला कठुवा में आसिफा नाम की आठ साल की बच्ची के साथ कुछ लोगों ने एक मंदिर के देव स्थान में बलात्कार जैसा घिनौना अपराध किया, बल्कि एक बलात्कारी को मेरठ से बुलाया और कहा गया आओ तुम भी अपनी प्यास बुझा लो और लड़की को बेहोशी की दवा देकर रखा गया उसके बाद बराबर बलात्कार होता रहा फिर गला घोंटकर मार दिया गया जिससे वो मर गई उसके जिन्दा रहने की कोई संभावना न रहे इसलिए सिर को पत्थर से दो बार मारा गया कि वो मर जाए तब तक एक पुलिस वाला कहता है कि अभी रुको वो एक और बार बलात्कार करना चाहता है, ऐसे जघन्य और शर्मसार कर देने वाले अपराध पर आज पूरे भारत के लोग आहत हैं और सड़को पर निकलकर अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहें हैं ज्यादातर लोग बलात्कार पर दूसरे देशों की तरह सजाए मौत और फांसी की मांग कर रहे हैं जिससे भविष्य में कभी कोई भी इंसान ऐसे अपराध न कर सके, इतने भयानक अपराध को अंजाम देने से इंसान की मानसिकता का पता चलता है, पूजा स्थल जैसी जगह पर ऐसे अपराध का होना ये जाहिर करता है कि इंसान किस हद तक गिर सकता है जब तक ऐसे बलात्कारियों और ऐसे घिनौने अपराधियों को कड़े से कड़ा दंड नही मिलता है तब तक ऐसी घटनाओं को रोकना या कम करना नामुमकिन है, दुनिया के जिस भी मुल्क में ऐसे बलात्कारियों की सख्त और कठोर सजा है वहां पर ऐसे अपराध करने से पहले लोगों को उसका अंजाम मालूम होने के कारण उस अपराध का खौफ है जिससे कि उस अपराध में कमी है या न के बराबर हैं, अपने भारत के अंदर भी बलात्कार करने वालो पर कानून सख्त और कठोर हो जाए तो इस देश के अंदर भी बलात्कारियों पर उनकी सजा के अंजाम का डर और खौफ उनके सामने होने के कारण उस अपराध से वो दूर भागेगा जिसकी वजह से अपराध में कमी होगी, अगर हिन्दुस्तान में विदेश की कंपनी और टेक्नोलॉजी या अन्य जरूरत के सामान लाकर भारत को मजबूत बनाया जा सकता है तो फिर वहां के कानून को लाकर भारत के लोगों और बच्चियों व महिलाओं की हिफाजत क्यों नही की जा सकती है, जब भारत को डिजिटल इंडिया बनाने के लिए देश विदेश की तर्क पर कार्य करके वहां की नक़ल की जा रही है जब बुलेट ट्रेन चलाने के लिए दूसरे देश का सहारा लिया जा रहा है, जब पेट्रोल, डीजल व बाहर से तमाम कंपनी के प्रोडक्ट, जरूरत की वस्तुए भारत में मौजूद है तो फिर बलात्कारियो के खिलाफ अपराधियों को सजा देने के लिए दूसरे देश का क़ानून क्यों नही है|
चीन में बलात्कार के मामले में जरा भी देरी नही की जाती है अपराधी को जल्द से जल्द मौत के घाट उतार दिया जाता है| सऊदी अरब में बलात्कारी को मौत की सजा दी जाती है और गुनहगार को तब तक पत्थर मारे जाते हैं जब तक वो मर न जाए गुनहगार को मारने से पहले काफी पीड़ा और यातना से गुजरना पड़ता है | मिस्र में बलात्कारी को फासी पर लटका कर मौत के घात उतारा जाता है | अफगानिस्तान में बलात्कारी के खिलाफ बेहद कड़े क़ानून हैं गुनाहगार को तीन या चार दिनों के भीतर ढूंढकर सिर में गोली मार के मौत दी जाती है | उत्तर कोरिया में एक के बाद एक गोली मारने की सजा है बलात्कारी के सिर में एक के बाद एक गोलियां दागी जाती हैं |
अब सवाल ये उठता है कि जब देश में एक तरफ बेटी बचाव का नारा जोरो पर है वंही दूसरी तरफ बेटियों के साथ ऐसे घिनौने हैवानियत से भरे अपराधों की बाढ सी आ गई है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो नारों के बजाए बेटियों की सुरक्षा के लिए सख्त और कठोर क़ानून बनाकर उनकी सुरक्षा सुनुष्चित करें |

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