आर्थिक बदहाली के चलते श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा

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श्रीलंका में आर्थिक संकट ने आम जन का जीवन बेहाल कर दिया है।इस आर्थिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने पहली अप्रैल 2022 से सार्वजनिक आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। इसके लिए राष्ट्रपति ने एक असाधारण गजट भी जारी कर दिया है।

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श्रीलंका के आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांगकी जा रही है। उनके आवास के सामने प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस इस प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार कर रही है। श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी के चलते ईंधन और रसोई गैस की भी कमी हो गई है साथ ही बिजली कटौती भी की जा रही है।

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था कर्ज में डूबी हुयी है। श्रीलंका ने दुनिया के कई देशों से करीब 3500 करोड़ डॉलर का कर्ज लिया हुआ है। इसमें से 400 करोड़ डॉलर से अधिक कर्ज उसे इस साल अदा करना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका की रिपोर्ट के मुताबिक़ श्रीलंका पर विदेशी कर्ज का 10 फीसदी हिस्सा चीन ने दिया है।

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान था मगर 2019 में कोलंबो में बम धमाके के बाद पर्यटन प्रभावित होने से श्रीलंका की आय में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। यहाँ इस साल मार्च में महंगाई दर बढ़कर 18.8 फीसदी रही।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका में वर्ष 2019 में गरीबों की संख्या 9.2 फीसदी थी। 2020 में ये दर बढ़कर 11.7 फीसदी हो गई, रिपोर्ट के अनुसार पांच लाख से अधिक लोग रोजाना 230 रुपये से आय पा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा 50 लाख ऐसे लोग ऐसे चिन्हित किए गए थे जिनके पास खाने के भी पैसे नहीं थे।

श्रीलंका में राष्ट्रपति राजपक्षे के बड़े भाई महिंदा प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं जबकि सबसे छोटे भाई तुलसी के पास वित्त विभाग है। सबसे बड़े भाई चमल कृषि मंत्री हैं और कैबिनेट में भतीजे नमल खेल पद की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं।

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