उद्धव ठाकरे और केसीआर बना रहे हैं नए विपक्ष के नए समीकरण

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मुंबई: तेलंगाना राष्ट्र समिति प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने रविवार को मुंबई में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात से तीसरा मोर्चा बनाने की चर्चा को और जोर मिला है। इससे पहले ऐसा प्रयास पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमों ममता बनर्जी ने भी किया था। उस समय कांग्रेस को शामिल किये जाने पर असमंजस बना हुआ था। लेकिन इस बार केसीआर-उद्धव और शरद पवार की मुलाकात तीसरे फ्रंट में कांग्रेस कांग्रेस की शिरकत बता रही है।

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शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने अपने बयां में स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि कांग्रेस के बगैर कोई फ्रंट बनेगा, जब ये बात ममता बनर्जी ने कही थी तब शिवसेना पहली राजनीतिक पार्टी थी। उन्होंने उस समय भी कांग्रेस को साथ लेने की बात कही थी।

उद्धव ठाकरे ने ये भी कहा कि उनके और के चंद्रशेखर राव बीच राजनीतिक, विकास और देश की परिस्थिति के बारे में चर्चा हुई। दोनों नेताओं की बहुत से विषय में सहमति हुई। के चंद्रशेखर राव बहुत जुझारू नेता हैं उनमें वो क्षमता है कि सबको साथ लेकर नेतृत्व करें।

ठाकरे और राव ने बदलाव को वक्त की जरूरत बताया जबकि पवार ने कहा कि देश के सामने मौजूद गरीबी, बेरोजगारी और कृषि संकट जैसे विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए सभी समान विचारधारा वाले दलों को एक साथ आने की जरूरत है।

कांग्रेस का कहना है कि वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के बीजेपी-विरोधी मोर्चा बनाने के प्रयासों का स्वागत करती है, हालांकि, साथ ही आगाह किया कि क्षेत्रीय दलों की इस तरह की पहल सत्तारूढ़ बीजेपी की ‘‘एकमात्र विकल्प’’ कांग्रेस के बिना सफल नहीं हो सकती।

इस पर कांग्रेस का कहना है कि वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के बीजेपी-विरोधी मोर्चा बनाने के प्रयासों का स्वागत करती है, हालांकि, साथ ही आगाह किया कि क्षेत्रीय दलों की इस तरह की पहल सत्तारूढ़ बीजेपी की ‘‘एकमात्र विकल्प’’ कांग्रेस के बिना सफल नहीं हो सकती।

इससे पहले पहली दिसंबर को ममता बनर्जी भी मुंबई आयीं थीं। उन्होंने उस समय कांग्रेस के बिना बीजेपी को मात देने के लिए तीसरे मोर्चे को मजबूती के साथ बनाने की पहल शुरू की। तब उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करते हुए राहुल गांधी पर भी हमला बोला था। हालांकि ममता बनर्जी को क्षेत्रीय दलों से उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल सका।

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