जनता की कसौटी और मज़बूत विपक्ष पर खरा उतरने को तैयार योगी राज 2.0

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योगी राज पार्ट-2 कल का शपथ ग्रहण पूरा हुआ और अगले कार्यकाल के लिए पार्टी ने कमान संभाल ली है। इस बार पश्चिमी यूपी पर ख़ास ध्यान दिया गया है। पिछली बार की तुलना में इस बार मध्य को छोड़ यूपी के चारों हिस्सों में सबकी हिस्सेदारी बढ़ी नज़र आई। सत्ता का केंद्र होने के बाद भी लखनऊ के बजाये आगरा, शाहजहांपुर व वाराणसी को तीन-तीन मंत्री दिए गए हैं।

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पश्चिमी यूपी भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण वाली जगह मानी जा रही थी। यहां से भाजपा ने अपनी मजबूती बनाए रखी। इसके लिए बड़े पैमाने पर मेहनत भी की गई। मुकाबले में कम सीट मिलने के बावजूद योगी कैबिनेट ने पश्चिमी यूपी को 25 मंत्री दे दिए। जबकि पिछली बार मैनपुरी से मंत्री बने रामनरेश अग्निहोत्री को इस बार नहीं लिया गया।

पूर्वांचल में मुख्यंत्री गोरखपुर से स्वयं है इसके अलावा 18 मंत्री पूर्वांचल को मिले हैं। प्रयागराज से केशव मौर्य उपमुख्यमंत्री के तौर पर यहां बरकरार हैं। इस बार बुंदेलखंड से तीन विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिला है। पहले दो मंत्री यहां से थे।

मध्य यूपी के मंत्रिपरिषद की बात करें तो यहाँ का प्रतिनिधित्व काफी कम हुआ है। अब इस क्षेत्र को पिछली बार नौ के मुकाबले में केवल सात मंत्री मिले हैं। बृजेश पाठक दिनेश शर्मा के स्थान पर उप मुख्यमंत्री बनाये गए हैं। जबकि पिछली परिषद में लखनऊ से उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के अलावा बृजेश पाठक, महेंद्र सिंह, आशुतोष टंडन, स्वाति सिंह, मोहिसन रजा को जगह मिली थी। इस बार कानपुर से भी कोई मंत्री नहीं बन पाया है।

75 जिलों में केवल 36 जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है और 39 जिलों से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया है। योगी सरकार के नए मंत्रिमंडल में इस बार सबसे युवा मंत्री संदीप सिंह और सबसे बुज़ुर्ग की बात करें तो डा. अरुण सक्सेना का नाम आता है।

2017 के घोषणा पत्र का हवाला देते हुए भाजपा ने दावा किया है कि उसने कमोबेश 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरे कर लिए हैं। इस बार भाजपा सरकार के सामने मौजूदा घोषणापत्र पर खरा उतरने की चुनौती है क्यूंकि पिछली बार की तुलना में एक मज़बूत विपक्ष उनके सम्मुख है। ऐसे में घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करना उनके लिए प्राथमिकता होगी।

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