मुंबई रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांता दास ने कोरोना महामारी की दुश्वारियों और चुनौतियों के बावजूद आर्थिक सुधार एवं विकास की गति को तेज बनाये रखने के लिए किये प्रयासों के संबंध में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए आज कहा कि ‘धैर्य खो देने से जंग में हार निश्चित है।’
श्री दास ने उनकी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की शुक्रवार को समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद कहा, “अगर पिछले अठारह महीनों के सबसे कठिन दौर में किये गये कठिन परिश्रम ने हमें कुछ सिखाया है तो वह कि शक्तिशाली चुनौतियों का सामना करने के लिए अदम्य मानवीय भावना पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए। अपने लचीलेपन और दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, हमने चुनौतियों को अवसरों में बदलना और नया करना सीख लिया है। आर्थिक सुधार की गति को और तेज करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जो हासिल किया गया है उससे खुश होकर आराम न करें बल्कि जो किया जाना बाकी है उस पर अथक प्रयास करें। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, “यदि आपने धैर्य खो दिया तो लड़ाई में हार निश्चित है।”
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आरबीआई ने सक्रिय और निर्णायक रूप से प्रतिक्रिया देने के लिए 100 से अधिक उपाय किए हैं। ऐसा करते हुए हम किसी नियम-पुस्तिका के बंदी नहीं रहे हैं। हमने वित्तीय बाजारों के कामकाज और बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखने के लिए नए और गैर परंपरागत उपाय करने में संकोच नहीं किया है। हालांकि महामारी प्रोटोकॉल हमें अलग करते हैं, प्रौद्योगिकी हमें एक साथ बांधती है। भारत पिछली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के समय की तुलना में आज बहुत बेहतर स्थिति में है।
श्री दास ने कहा कि विकास की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है और हमें इस तथ्य से संतोष प्राप्त होता है कि मुद्रास्फीति अनुमान से अधिक अनुकूल हो रहा है। वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद हम भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहद-आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों के लचीलेपन के द्वारा हाल की विकट परिस्थिति उबरने और सामान्य समय की ओर बढ़ने की उम्मीद करते हैं।


















