ब्रिटेन का यह ऐलान तब आया है जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन को मिसाइल दी तो रूस हमला करेगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अमेरिका और पश्चिमी देशों को दी गई चेतानी के एक दिन बाद ही ब्रिटेन ने ऐलान किया है कि वह यूक्रेन को रूस के हमले को रोकने में मदद करने के लिए उन्नत हथियार प्रदान करने में अमेरिका के साथ शामिल होगा। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने घोषणा करते हुए कहा कि जैसे रूस की रणनीति बदलती है वैसे ही यूक्रेन को हमारा समर्थन होना चाहिए। इतना ही नहीं यह भी कहा गया कि यूक्रेनी सैनिकों को नए लॉन्चरों का उपयोग करने के तरीके के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
दरअसल, ब्रिटेन ने यूक्रेन को अत्याधुनिक M270 रॉकेट लॉन्चर देने का ऐलान किया है। इस रॉकेट लॉन्चर की प्रभावी फायरिंग रेंज 80 किलोमीटर बताई जा रही है। ब्रिटेन ने रूस के साथ युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन की मदद की है। ब्रिटेन ने यूक्रेन को एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइलों का जखीरा भेजा था। वालेस ने कहा कि यूक्रेन के लिए ब्रिटेन का समर्थन जारी रहेगा। फिलहाल वर्तमान में ब्रिटिश सेना यूक्रेनी सैनिकों को बख्तरबंद वाहनों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित कर रही है।
इससे पहले हाल ही में अमेरिका ने भी यूक्रेन को हार्पून एंटी शिप मिसाइल और M142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम देने का ऐलान किया था। अमेरिका ने यूक्रेन के लिए 700 मिलियन डॉलर की सुरक्षा सहायता देने की भी योजना की घोषणा की थी, जिसमें चार सटीक-निर्देशित, मध्यम-श्रेणी के रॉकेट सिस्टम, साथ ही हेलीकॉप्टर, जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम, रडार, सामरिक वाहन और बहुत कुछ शामिल हैं।
ब्रिटेन का यह ऐलान तब आया है जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन को लॉन्ग-रेंज मिसाइल दी तो रूस नए टारगेट पर हमला करेगा। पुतिन ने कहा था कि हम ऐसे टारगेट्स पर हमला करेंगे, जिन पर अभी तक हमने हमला नहीं किया है। हालांकि पुतिन ने उन टारगेट्स का नाम नहीं बताया था।
बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग को 100 से ज्यादा दिन हो गए हैं, लेकिन कोई नतीजा निकलते हुए नहीं दिख रहा है। इधर, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने दावा किया है कि अब तक हमने रूसी सेना के 31 हजार सैनिकों को मार गिराया है। यह आंकड़ा युद्ध शुरू होने यानी 24 फरवरी से 3 जून तक का है।


















