अच्छी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण
लखनऊ। नई शिक्षा नीति सभी मायनों में बेहतर है और हर जगह इसकी सराहना हो रही है। यह बात आज बीबीएयू में सुशासन पर आयोजित वेबिनार में मुख्य अतिथि ट्राइबल अफेयर मंत्री अर्जुन मुंडा ने कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच का नतीजा है कि आज देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है जिसमें सभी के कल्याण की सोच निहित है। सुशासन के लिए समावेशी विकास एक आवश्यक मापदंड है। इसमें जनता की भी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस लोकतांत्रिक गणराज्य में, सही ढंग से संवैधानिक व्यवस्था में रहते हुए हमारी व्यवस्था सभी को समान अवसर उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका किस प्रकार देखती है यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। सुशासन के लिए निर्णय लेना, निर्णय को लागू करने और उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया, तीनों बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। तभी वर्ग रहित प्रगति हो सकेगी जिनमें किसी भी प्रकार के भेदभाव की जगह शेष न रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लविवि के कुलपति प्रो. आलोक राय ने शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे जिसमें अच्छी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण भी किया जाए। ताकि जब विद्यार्थी अपने विश्वविद्यालयों से निकले तब वे एक बेहतर व्यक्ति के तौर पर समाज के विकास में अपना योगदान दे।
इस अवसर पर यूजीसी अध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह ने इंक्लूसिव गवर्नेंस पर अपने विचार रखे और कहा कि सुशासन में सभी की भागीदारी अहम होती है। उन्होंने 2030 सतत विकास के लक्ष्यों से वेबिनार की विषय वस्तु को जोड़ते हुए देश के प्रत्येक व्यक्ति के विकास की बात की।
उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की आर्थिक, भाषायी और परिवेश से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की और कहा कि नई शिक्षा नीति ने वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की इन समस्याओं का समाधान कर दिया है।
यूजीसी सेक्रेटरी रजनीश जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया और बताया कि इस वेबिनार श्रृंखला में 7 अक्टूबर तक विभिन्न विषयों पर 10 वेबिनार आयोजित किये जायेंगे। बीबीएयू के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय वेबिनार अत्यंत प्रासंगिक एवं समसामयिक विषय पर आयोजित किया जा रहा है। समावेशी शासन सुशासन का एक हिस्सा है। इस तरह की व्यवस्था हमारी संस्कृति की विशेषता है। हमारी संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम, सर्वे भवंतु सुखिन: की कामना एवं एकत्व से समत्व की अवधारणा निहित है।