हत्यारे ने जादू-टोना कराने के शक में पड़ोसी के दो बच्चों को बेरहमी से मारा

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सात साल और पांच साल के दो सगे भाइयों को गला रेतकर मारने के मामले में एडीजे 3 ज्योति कुमार त्रिपाठी की कोर्ट ने हत्यारोपी को दोषी पाकर फांसी और दस हजार रुपये की सजा सुनाई है। हत्यारे ने जादू-टोना कराने के शक में पड़ोसी के दो बच्चों को बेरहमी से मारा था। कोर्ट ने इसे विरलतम कृत्य करार दिया है। अभियुक्त को हाईकोर्ट में अपील के लिए एक माह का समय दिया गया है। अपील न होने पर अभियुक्त को ठीक एक माह बाद फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा।

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कानपुर सरसैया घाट स्थित जनाना घाट के पास बनी झुग्गी झोपड़ी (बिहारी लाइन) में मूलरूप से मुंगेर बिहार के लव्वा गिरी निवासी टिंकू पाल पत्नी हीरा, बेटे गोलू, साहिल, कार्तिक और बेटी आरती के साथ रहता था। टिंकू और हीरा कबाड़ बीनते थे। टिंकू के पड़ोस में मुंगेर जमालपुर निवासी रिक्शा चालक राजेश माझी रहता था। टिंकू ने राजेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि 28 अगस्त 2013 को राजेश का दस साल का बेटा शिवम बीमारी से मर गया था। राजेश को शंका थी कि टिंकू पाल ने जादू-टोना करवा कर उसे मरवा दिया है।

इसलिए वह बदला लेने की फिराक में रहता था। 29 अगस्त 2013 को सुबह आठ बजे राजेश ने घर के बाहर खेल रहे टिंकू पाल के सात साल के बेटे साहिल को पकड़ लिया। उसने साहिल को जमीन पर पटका और छाती पर पैर रखने के बाद चाकू से उसका गला रेत कर मार डाला। इसके बाद साहिल के छोटे भाई पांच साल के कार्तिक को भी उसी तरह गला रेतकर मार दिया। इसके बाद टिंकू पाल के तीसरे बेटे दस साल के गोलू को भी पीटने लगा।

उसे भी मारने की फिराक में था लेकिन तब तक भीड़ ने उसे घेर लिया तो वह सबको चाकू मारने की धमकी देने लगा। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने उसे चाकूसमेत गिरफ्तार किया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने बताया कि घटना के समय कार्तिक खाना खा रहा था। पोस्टमार्टम में उसके पेट में वही खाना निकला। खाना पचा तक नहीं था। यह दोहरी हत्या का विरलतम मामला था। इसलिए उन्होंने कोर्ट से मृत्यु दंड की मांग की थी। कोर्ट ने राजेश माझी को फांसी की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने 55 पेज के फैसले में कहा है कि अभियुक्त द्वारा पूरे समाज के लिए खतरा पैदा किया गया है। जैसा कि साक्ष्य में आया है कि यदि वादी का तीसरा पुत्र थोड़ा बड़ा होने के कारण शोर मचाकर न भागता तो अभियुक्त की पाशविकता का शिकार हो सकता था।

साक्ष्य में आया है कि घटना के समय आसपास भय का वातावरण बन गया था। लोगों ने घरों के दरवाजे बंद कर लिए थे। इस तरह से अभियुक्त वादी के शेष बचे परिवार और समाज के लिए खतरा है। अभियुक्त ने अत्यंत क्रूर और राक्षसी परिस्थितियों में वीभत्स तरीके से एक के बाद एक दोनों अबोध बच्चों की चाकू से गला काटकर निर्मम और जघन्य हत्या की है। यह कृत्य विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है। मृत्यु दंड केअतिरिक्त अन्य कोई वैकल्पिक परिस्थिति प्रकट नहीं होती है।

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