घटेगी कर की दर…और बढ़ेगा दायरा!

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छोटे-मझोले उपक्रमों को बड़ी राहत देते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर गठित मंत्रियों के समूह ने कंपोजिशन स्कीम में व्यापक संशोधन की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि इस योजना को आकर्षक बनाने के लिए दरों को कम किया जाए, सालाना कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये की जाए और अंतरराज्यीय आपूर्ति की अनुमति दी जाए। कंपोजिशन योजना में जीएसटी अनुपालन को सहज बनाने के लिए कर की एक समान दर रखी गई है लेकिन अब तक कारोबारियों की ओर से इसे ठंडी प्रतिक्रिया ही मिली है, जिसकी वजह से जीएसटी परिषद को इस पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।
असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में गठित मंत्रियों के समूह ने इस योजना को अपनाने वाले कारोबारियों की सालाना कारोबार सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया है, ताकि इस योजना का दायरा बढ़ सके और अधिक संख्या में कारोबारी इसे अपना सकें। शर्मा ने नई दिल्ली में कहा, ‘हमने कंपोजिशन योजना को आकर्षक बनाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इसे अंतिम निर्णय के लिए जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जाएगा।’
मंत्रिसमूह ने कंपोजिशन स्कीम में विनिर्माताओं और रेस्टोरेंटों के लिए दरों को एक समान 1 फीसदी रखने का सुझाव दिया है। अभी विनिर्माताओं के लिए 2 फीसदी और रेस्टोरेंटों के लिए 5 फीसदी कर की व्यवस्था है। इसके साथ ही मंत्रिसमूह ने कहा है कि जो कारोबारी छूट या बिना छूट वाली वस्तुओं का कारोबार करते हैं और अपने कुल कारोबार में उसे शामिल करते हैं, उनके लिए जीएसटी दर 0.5 फीसदी रखी जाए और गैर-छूट वालों के लिए 1 फीसदी कर की दर रखी जाए। विनिर्माण के तहत जॉब वर्क को भी कंपोजिशन स्कीम में शामिल करने की अनुमति दी जाए।
मंत्रिसमूह की सिफिारिशों को 10 नवंबर को गुवाहाटी में होने वाली बैठक में जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जाएगा। परिषद द्वारा गठित मंत्रिसमूह ने कंपोजिशन डीलरों को अंतर-राज्यीय बिक्री की अनुमति देने का भी सुझाव दिया है। शर्मा ने कहा, ‘जीएसटी एक देश, एक कर है। ऐसे में डीलरों को अंतरराज्यीय बिक्री की अनुमति  मिलनी चाहिए।’ मंत्रिसमूह ने कहा है कि एसी और बिना एसी वाले रेस्टोरेंटों को इनपुट टैक्स क्रेडिट देना जारी रखना चाहिए और इसकी दर 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करना चाहिए। शर्मा ने कहा, ‘हमारा मानना है कि रेस्टोरेटों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता रहे। इस बारे में दरों का निर्णय परिषद द्वारा किया जाएगा।’ हालांकि मंत्रिसमूह कंपोजिशन स्कीम में कारोबार से कारोबार के बीच लेनदेन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले में आम सहमति नहीं बना पाया। इस बारे में परिषद द्वारा निर्णय किया जाएगा।
कंपोजिशन स्कीम के तहत अब तक 15 लाख कारोबारियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि जीएसटी कारदाताओं की संख्या 89 लाख है। पैनल ने यह सुझाव भी दिया है कि सभी जीएसटी करदाताओं को तिमाही आधार पर रिटर्न भरने की अनुमति दी जानी चाहिए लेकिन वे कर का भुगतान मासिक आधार पर करेंगे। पैनल ने रिटर्न दाखिल करने में देरी पर प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। वर्तमान में यह जुर्माना 200 रुपये प्रतिदिन है। जीएसटी परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री  अरुण जेटली पहले ही कंपोजिशन स्कीम के तहत सालाना कारोबार की सीमा को 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर चुके हैं। यह सुविधा 31 मार्च तक खुली है। इसके अलावा 1.5 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाले करदाताओं को तिमाही आधार पर कर भुगतान और रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
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