नयी दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का नये भारत की नयी सोच के आड़े आने वाली पुरानी प्रक्रियाओं को बदलने का आह्वान करते हुए आज कहा कि दोनो शीर्ष एजेंसियां कानून को इस प्रकार से लागू करें जिससे शासनतंत्र में गरीब एवं ईमानदार लोग मजबूत हों और भ्रष्टाचारी-अपराधी बाहर जायें।
श्री मोदी ने आज गुजरात के केवड़िया में केन्द्रीय सतर्कता विभाग (सीवीसी) और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक संयुक्त सम्मेलन को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए अधिकारियों का आह्वान किया कि वे अब प्रिवेंटिव विजिलेंस यानी अपराध की संभावना की निगरानी एवं सतर्कता रखने का काम करें। इससे संसाधनों की बचत होगी और अपराधों पर असरदार ढंग से लगाम लगेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम भारत की आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आने वाले 25 वर्ष, यानि इस अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत के विराट संकल्पों की सिद्धि की तरफ देश बढ़ रहा है। आज हम सुशासन, जनोन्मुखी, सक्रिय शासन को सशक्त करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार चाहे छोटा हो या बड़ा, वो किसी ना किसी का हक छीनता है। ये देश के सामान्य नागरिक को उसके अधिकारों से वंचित करता है, राष्ट्र की प्रगति में बाधक होता है और एक राष्ट्र के रूप में हमारी सामूहिक शक्ति को भी प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि बीते छह सात सालों के निरंतर प्रयासों से हम देश में एक विश्वास कायम करने में सफल हुए हैं, कि बढ़ते हुए भ्रष्टाचार को रोकना संभव है। आज देश को ये विश्वास हुआ है कि बिना कुछ लेन-देन के, बिना बिचौलियों के भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है और आज देश को ये भी विश्वास हुआ है कि देश को धोखा देने वाले, गरीब को लूटने वाले, कितने भी ताकतवर क्यों ना हो, देश और दुनिया में कहीं भी हों, अब उन पर रहम नहीं किया जाता, सरकार उनको छोड़ती नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमने देशवासियों के जीवन से सरकार के दखल को कम करने को एक मिशन के रूप में लिया। हमने सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए। अधिकतम सरकारी नियंत्रण की बजाय न्यूनतम सरकार एवं अधिकतम शासन पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि आज सरकार देश के नागरिकों पर भरोसा करती है, उन्हें शंका की नजर से नहीं देखती। इस भरोसे ने भी भ्रष्टाचार के अनेकों रास्तों को बंद किया है। इसलिए दस्तावेज़ों की सत्यापन की अनिवार्यता को हटाकर, भ्रष्टाचार और अनावश्यक परेशानी से बचाने का रास्ता बनाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीते कुछ वर्षों में हमने हजारो पुराने एवं अप्रासंगिक कानूनों काे समाप्त किया है और आगे भी हजारों कानूनों को समाप्त किया जाएगा। इससे जनजीवन आसान होगा। उन्होंने कहा कि हाल में शुरू प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, इससे भी निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी अनेक मुश्किलें समाप्त होने वाली हैं।
श्री मोदी ने कहा, “जब हम भरोसे और तकनीक के दौर में आगे बढ़ रहे हैं, तो आप सभी साथियों, आप जैसे कर्मयोगियों पर देश का भरोसा भी उतना ही अहम है। हम सभी को एक बात हमेशा याद रखनी है- राष्ट्र प्रथम ! हमारे काम की एक ही कसौटी है- जनहित, जन-सरोकार। यदि इस कसौटी पर कोई खरा उतरता है तो उसके साथ किसी भी मुश्किल में वह साथ खड़े रहेंगे।”
प्रधानमंत्री ने तकनीक के जरिये अपराधों खासकर साइबर धोखाधड़ी की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के बहुत से फ़ायदे हैं पर इसके नकारात्मक पहलू भी हैं जिनसे निपटना ज़रूरी है। अपराधी तकनीक की तोड़ ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसियों को अपराधियाें से दो कदम आगे ही रहना है। देशवासियों को धोखा देने वालों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह कहीं नहीं हो सकती है। कोई कितना ही ताकतवर क्यों ना हो। देशहित के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जा सकता है। पर यह भी ध्यान रखना है कि हमारा काम किसी को डराना नहीं है। बल्कि गरीब आम आदमी के मन से डर दूर होना चाहिए।
श्री मोदी ने दोनो एजेंसियों से कहा, “इस पर आप मंथन करें कि सीबीआई और सीवीसी में दशकों से ऐसी प्रक्रिया जो नये भारत की नयी सोच के आड़े आती हैं उन्हें हटाया जाए। इसके लिए इससे बेहतर समय क्या हो सकता है जब देश अमृत महोत्सव मना रहा है। आप इसमें जुट जायें। आपको कमियां और जहां से भ्रष्टाचार पनपता है वह मालूम है। हमारे सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टोलेरेंस की नीति है। आप कानूनों को इस तरह से लागू करें कि ग़रीब एवं ईमानदार सिस्टम के क़रीब आए और भ्रष्टाचारी इससे बाहर जायें।”
उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी का भारत, आधुनिक सोच के साथ ही तकनीक को मानवता के हित में इस्तेमाल करने पर बल देता है। नया भारत नये तरीके खोजता है और उन्हें क्रियान्वित करना है। नया भारत अब ये भी मानने को तैयार नहीं कि भ्रष्टाचार सिस्टम का हिस्सा है। उसे पारदर्शी व्यवस्था चाहिए, प्रभावी एवं आसान प्रक्रिया चाहिए और सरल शासन प्रणाली चाहिए।


















