भारत में तेल के दामों में जोरदार उछाल

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दुनिया में तेल की कीमतों में भारी कमी के बावजूद भारत में तेल के दामों में जोरदार उछाल ने आम लोगों को परेशानी में डाल रखा है। 2014 के बाद से क्रूड ऑइल की कीमतों में करीब 60 फीसदी की कमी आ चुकी है, लेकिन देश में रिटेल पेट्रोल और डीजल के भाव में गिरावट की जगह तेजी ही आ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा आखिर मिल किसे रहा है? आइए नीचे समझते हैं

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दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक भारत
भारत क्रूड ऑइल का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है। कोयले (जिसका घरेलू उत्पादन होता है) के बाद यह ऊर्जा का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। यह हमारे वीइकल्स, ट्रेनें, बसों और जेनरेटर्स के लिए जरूरी है। हम हर दिन 45 लाख बैरल क्रूड ऑइल का आयात करते हैं। दूसरे शब्दों में, मौजूदा वैश्विक कीमतों के मुताबिक हम क्रूड ऑइल खरीदने पर विदेशी मुद्रा भंडार से प्रतिदिन 17 अरब रुपये से अधिक खर्च करते हैं। हमने अमेरिका से भी इसका आयात शुरू कर दिया है।

3 साल में करीब 60 फीसदी घटी क्रूड ऑइल की कीमत
मई 2014 के बाद क्रूड ऑइल की कीमत करीब 60 फीसदी कम हो चुकी है, लेकिन रिटेल पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल के दामों में गिरावट नहीं आई है। आप एक लीटर पेट्रोल पर करीब 80 रुपये और डीजल प्रति लीटर 63 रुपये खर्च कर रहे हैं। तो फिर क्रूड ऑइल में भारी कमी का फायदा किसे मिल रहा है?

क्रूड ऑइल पर ये है टैक्स का खेल
इसमें सबसे आगे हैं हमारी सरकारें, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें। केंद्र इस पर एक्साइज टैक्स लगाता है और राज्य सरकारें वैट वसूलती हैं। बता दें, पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखा गया है। इन टैक्सों को रुपये प्रति लीटर के रूप में निर्धारित किया जाता है, ना कि प्रतिशत में। इसलिए जब क्रूड ऑइल की कीमत कम होती है तो एक्साइज और वैट बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप सरकार को अधिक टैक्स मिलने लगता है।

पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के बावजूद भी महंगाई दर काबू में
यह सच है कि हमारी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन ऑइल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को कीमतें तय करने की छूट दी है, लेकिन एक्साइज टैक्स में बदलाव कर दिए जाने की उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतें चुकानी पड़ रही हैं। शुक्र है कि विनिमय दर स्थिर है। पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों के बावजूद महंगाई दर भी काबू में है। ह्यूस्टन में आए तूफान की वजह से भी तेल की कीमत बढ़ी है।

इन्हें हो रहा है खूब फायदा
तेल की ऊंची कीमतों का दूसरा फायदा ऑइल मार्केटिंग कंपनियों को मिल रहा है। उन्हें दाम तय करने की छूट है और वे कम इनपुट खर्च के साथ पुराने दर पर तेल बेच रही हैं, इससे इनके लाभ में भी वृद्धि हुई है। एविएशन सेक्टर को भी इसका खूब फायदा मिल रहा है। कच्चे तेल में गिरावट का लाभ सीधे विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) में प्रेषित हुआ। यह एयरलाइन्स चलाने की सीमांत लागत का 90 फीसदी होता है। हैरानी की बात नहीं है कि पिछले तीन साल से हवाई यात्रियों की संख्या में हर साल 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है।

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