सिक्किम स्थित भारत चीन सीमा पर जारी तनाव, हिन्द महासागर और अदन की खाड़ी में चीनी युद्धपोतों का बढ़ती संख्या, दोनों देशों के नेताओं और मीडिया की बयानबाजियों के बीच वियतनाम ने दक्षिणी चीन सागर में तेल के एक ब्लॉक के अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) का ठेका दोबारा भारत को दे दिया है। दक्षिण चीन सागर स्थित वियतनामी जल क्षेत्र पर चीन भी दावा करता है। चीन का दक्षिण चीन सागर की जलसीमा को लेकर वियतनाम समेत फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और ताईवान इत्यादि देशों से विवाद है।
जाहिर है वियतनाम का ये फैसला जहां भारत की भूराजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा वहीं चीन को इससे कड़ा कूटनीतिक संदेश भी जाएगा। भारत सरकार द्वारा संचालित ओनजीएसी विदेश को वियतनाम ने दक्षिण चीन सागर स्थित ब्लॉक 128 के अन्वेषण का दो साल के लिए ठेका दिया है। ओएनजीसी विदेश के मैनेजिंग डायरेक्टर के वर्मा ने ये जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दी।
चीन के विस्तारवादी नीति का जवाब देने के लिए भारत ने पूर्वी एशिया के कई देशों के संग अपने संबंध पिछले कुछ सालों में बेहतर बनाए हैं। वियतनाम का ताजा फैसला उसी सिलसिले की एक कड़ी है। पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी वियतनाम गए थे। वो पिछले 15 साल में वियतनाम जाने वाले पहले भारतीय पीएम थे। पीएम मोदी ने वियतनाम को 50 करोड़ डॉलर का कर्ज हथियार खरीदने के लिए दिया था। वियतनाम, म्यांमार, फिलीपींस के अलावा जापान के साथ भी भारत के रिश्ते बहुत अच्छे हैं।


















