नुकसान के बावजूद डेंट से बच गई भाजपा

0
120

उत्तर प्रदेश में पिछले दस साल के दौरान हुए चार चुनावों में भाजपा की बात करें तो दिलचस्प आंकड़े सामने आये हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों में भाजपा को वोट तो फ़ायदा हुआ है मगर सीट का घाटा उठाना पड़ा। बिलकुल ऐसा ही नतीजा विधानसभा के पिछले दो चुनावों में देखने को मिला। मगर दोनों ही बार का नुकसान भाजपा को डेंट नहीं मार सका।

ADVT

नतीजे बताते हैं कि बीते दस साल में होने वाले चार चुनावों में भाजपा उस समय लाभ में रही जब मुकाबला बहुकोणीय हुआ लेकिन गठबंधन की कमज़ोरी के चलते पार्टी को दूसरी बार घाटा उठाना पड़ा है। पिछले के मुकाबले इस चुनाव में भाजपा के वोट शेयर में डेढ़ फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ जबकि मगर उसकी सीटें 312 से कम होकर 255 हो गई।

भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी बार भी विधानसभा चुनाव में लोकसभा का प्रदर्शन नहीं दुहरा सकी। 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले में भाजपा को विधानसभा चुनाव में करीब 3 फीसदी कम वोट मिले थे। इस विधानसभा चुनाव में बीते लोकसभा चुनाव के मुकाबले करीब नौ फीसदी कम वोट मिले हैं।

लोकसभा चुनाव में अगर 2014 की बात करें तो भाजपा को बहुकोणीय मुकाबले का भरपूर लाभ मिला था। उस समय सपा, कांग्रेस और बसपा अपना जोर आज़मा रही थीं। उस समय भाजपा को गठबंधन के साथ राज्य की 80 में से 73 सीटों पर कब्ज़ा मिला था और उसका वोट प्रतिशत भी 43 था। लेकिन अगर 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो सपा-बसपा के साथ आ जाने के कारण मुकाबले का ध्रुवीकरण हुआ और इस चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 50 पार किया था लेकिन सीटें 73 से घट कर 64 ही बची थीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here