पाक आतंकी अजहर को बचाने में चीन बेनकाब

0
182

नई दिल्ली। आंतक के मुद्दे पर चीन का दोहरापन एक बार फिर सामने आ गया है। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को चीन ने रोक दिया। इससे अजहर के जरिए पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ दबाव बनाने की भारत की रणनीति फिलहाल असफल होती तो दिख रही है लेकिन विदेश मंत्रालय इससे चुप बैठने नहीं जा रहा। बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस व अन्य देशों की मदद से अजहर के खिलाफ प्रतिबंध लाने का प्रस्ताव लगातार संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में पेश किया जाएगा ताकि आतंक के मुद्दे पर चीन पर भी दबाव बढ़े।

ADVT

सनद रहे कि गुरुवार को देर रात यूएन में पठानकोट सेना कैंप पर हमले का प्रमुख साजिशकर्ता और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने से जुड़े प्रस्ताव को चीन ने ब्लाक कर दिया। यह चौथा मौका है जब चीन की वजह से यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया है। कई बार चीन इसे वीटो कर चुका है लेकिन गुरुवार को उसने प्रस्ताव को ब्लाक किया है। तकनीकी तौर पर इसका मतलब यह हुआ कि अब कई महीनों तक अजहर को लेकर प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा। इसके बाद चीन ने भारत के जख्म पर नमक छिड़कते हुए कहा है कि वह भारत के साथ रिश्ते को लगातार मजबूत करने को तैयार है। जाहिर है कि भारत चीन के इस व्यवहार से काफी नाराज है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, ”चीन के इस कदम से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने की हमारी प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ा है। और न ही दुनिया के दूसरे देशों के साथ मिल कर आंतक के खिलाफ कार्रवाई करने की हमारी कोशिशों पर कोई असर पड़ने वाला है। असलियत में हम ज्यादा प्रतिबद्ध तरीके से आगे बढ़ंगे। जहां तक मसूद अजहर को ले कर लाये गये प्रस्ताव का सवाल है तो सिर्फ एक देश के विरोध की वजह से वह पारित नहीं हो सका।” संयुक्त राष्ट्र के स्थाई और अस्थाई 15 देशों में से 14 इस प्रस्ताव के पक्ष में थे। भारत ने चीन के रवैये पर बेहद गहरी निराशा जताई है।

भारत अब इस बात को बखूबी समझ गया है कि चीन इस पूरे प्रकरण पर जम कर राजनीति कर रहा है। एक तरफ तो ब्रिक्स देशों और शंघाई सहयोग संगठन के घोषणा पत्र में वह भारत के साथ सुर में सुर मिला कर हर देश को आतंक को पनाह देने के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करता है लेकिन दूसरी तरफ अपने मित्र देश पाकिस्तान में पनाह ले रहे आतंकी को बचाने के लिए दुनिया के तमाम देशों के विचार का विरोध कर रहा है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि ब्रिक्स घोषणा पत्र में इस बार पहली बार अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का जिक्र भी किया गया है। इसे चीन के रवैये में बदलाव के तौर पर देखा गया था।

भारत की भावी रणनीति के बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास बार बार प्रस्ताव लाने के अलावा फिलहाल कोई चारा नहीं है। चीन का कहना है कि इस मामले पर भारत को पाकिस्तान से बात कर सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान में आतंकवाद पर दिसंबर, 2015 के बाद से कोई बात नहीं हुई है। पठानकोट हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में नजरबंद करने की सूचना भी आई थी लेकिन उसके बाद पाकिस्तान हुक्मरान उसको लेकर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। पठानकोट हमले की पाकिस्तान के पंजाब पुलिस की तरफ से की गई जांच की रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here