लखनऊ: सहादतगंज तिहरे हत्याकांड मामले में आरोपित के मकान और आसपास की जमीन की विस्तृत पैमाइश शुक्रवार को पूरी कर ली गई। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ETS) तकनीक से सर्वे कराया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मकान निजी जमीन पर बना है या सरकारी नजूल भूमि पर अतिक्रमण करके निर्माण किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे रिपोर्ट शनिवार को आने की उम्मीद है।
रास्ते की जमीन पर बनी थी मकान की चहारदीवारी
मंगलवार शाम एलडीए की टीम ने मौके का निरीक्षण किया था। इस दौरान आरोपित के मकान की चहारदीवारी रास्ते की जमीन पर बनी पाई गई थी, जिसके बाद उसे ध्वस्त करा दिया गया था।
इसके बाद अधिकारियों को आशंका हुई कि मकान का कुछ हिस्सा भी सरकारी जमीन पर हो सकता है। इसी संभावना की जांच के लिए शुक्रवार को पूरे क्षेत्र की विस्तृत पैमाइश कराई गई।
बारिश के बावजूद छह सदस्यीय टीम ने पूरा किया सर्वे
एलडीए के नजूल अधिकारी प्रभाकर सिंह के अनुसार, मेसर्स शिव सर्वेयर की छह सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को आधुनिक तकनीक की मदद से जमीन की पैमाइश की। बारिश होने के बावजूद सर्वे का काम पूरा कर लिया गया। इस प्रक्रिया में करीब चार घंटे लगे।
सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि आरोपित का मकान निजी भूमि पर स्थित है या सरकारी नजूल जमीन पर कब्जा करके बनाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद एलडीए आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
अवैध निर्माण के मामले में पहले ही जारी हो चुके हैं नोटिस
एलडीए की ओर से आरोपित के पिता और परिवार के दो अन्य सदस्यों को अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसी मामले में मकान को सील भी किया जा चुका है।
यदि विस्तृत सर्वे में सरकारी नजूल भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो प्राधिकरण नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है। सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया संबंधित नियमों के तहत अलग से की जाएगी।
अभिलेखों के सत्यापन के बाद होगा अगला फैसला
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि विस्तृत जांच पूरी हो गई है। हालांकि, आगे की कार्रवाई से पहले सरकारी अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का सही तरीके से मिलान किया जाएगा।
सर्वे रिपोर्ट और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह तय होगा कि मकान के संबंध में आगे क्या कार्रवाई की जानी है।
क्या है ETS सर्वे?
ETS यानी इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन जमीन की पैमाइश और सीमांकन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है। इसकी मदद से जमीन की दूरी, कोण और सीमाओं को सटीक रूप से मापा जा सकता है।
यह उपकरण इलेक्ट्रॉनिक मापन, ऑप्टिकल तकनीक और डिजिटल डेटा की सहायता से जमीन के निर्देशांक निर्धारित करने में मदद करता है। भूमि विवादों और सरकारी जमीन पर संभावित अतिक्रमण की जांच में इस तकनीक का उपयोग किया जाता है।
लखनऊ के इस मामले में ETS सर्वे का उद्देश्य मकान की वास्तविक स्थिति और सरकारी नजूल भूमि की सीमाओं का मिलान करना है।
रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल एलडीए की अगली कार्रवाई सर्वे रिपोर्ट और सरकारी अभिलेखों के सत्यापन पर निर्भर करेगी। यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्ट आने तक मकान की जमीन को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।


















