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KGMU धर्मांतरण नेटवर्क: एसटीएफ रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम, शासन ने दिए कानूनी कार्रवाई के आदेश

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लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ में कथित धर्मांतरण नेटवर्क और महिला डॉक्टरों व कर्मचारियों के उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में विभिन्न विभागों के प्रकरणों, शिकायतों पर कथित तौर पर कार्रवाई नहीं होने और कुछ आरोपितों को संरक्षण दिए जाने की आशंकाओं का जिक्र है।

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रिपोर्ट के आधार पर शासन ने चिह्नित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।

30 अक्टूबर को शासन ने केजीएमयू को भेजा पत्र

चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-दो के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने 30 अक्टूबर को केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजा। इसमें एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी आख्या शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

शासन ने केजीएमयू अधिनियम, 2002 और परिनियमावली, 2011 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। अब संबंधित मामलों में विश्वविद्यालय की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोप

एसटीएफ की रिपोर्ट में कुछ महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाने, धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने और निकाह का दबाव बनाने जैसे आरोपों का उल्लेख है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने या शिकायत दर्ज कराने पर कुछ महिलाओं को करियर प्रभावित करने की धमकी दी गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ मामलों में आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई रोकने की कोशिश किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

पैथोलॉजी विभाग के दो मामलों का उल्लेख

रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज से जुड़े मामले का जिक्र है। दस्तावेज के अनुसार, महिला रेजिडेंट डॉक्टर देवव्रती मिश्रा की शिकायत पर 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

रिपोर्ट में रमीज पर महिला डॉक्टर को कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप दर्ज हैं। दस्तावेज में उनकी गिरफ्तारी की तारीख 9 जनवरी 2026 बताई गई है। मामले में विवेचना का भी उल्लेख किया गया है।

पैथोलॉजी विभाग के ही रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े एक अन्य मामले का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर 29 दिसंबर 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इन मामलों में आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के आधार पर होना है।

गांधी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े आरोप

एसटीएफ की रिपोर्ट में गांधी वार्ड के संदर्भ में नर्सिंग स्टाफ नफीस और पुरकान तथा रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में कुछ महिला नर्सिंग कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रभावित करने, उत्पीड़न करने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने संबंधी शिकायतों का जिक्र है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शिकायत के बाद समिति गठित

माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर ज्योति राव की शिकायत भी एसटीएफ की रिपोर्ट में शामिल है। इसमें वरिष्ठ कर्मचारी शाकत अली पर उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने और शिकायत के बाद समिति गठित किए जाने का उल्लेख है।

रिपोर्ट में आरोप है कि शिकायत के बावजूद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में भी शिकायत, विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

अन्य डॉक्टरों और कथित समूह के संपर्कों का भी जिक्र

एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉक्टर वाहिद अली समेत कुछ अन्य चिकित्सकों और कर्मचारियों के संपर्कों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रभावित करने तथा कथित धर्मांतरण के प्रयासों में सहयोग करते थे।

इसके अलावा, रिपोर्ट में इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह और उससे संबंधित सामग्री का उल्लेख करते हुए कुछ डॉक्टरों के बीच संपर्कों की चर्चा की गई है। इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़े डॉक्टर नसीम खान के संदर्भ में भी कुछ आरोप दर्ज होने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में इन संदर्भों और संपर्कों का उल्लेख अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध सिद्ध नहीं करता। प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति की भूमिका और आरोपों की सत्यता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण आवश्यक है।

अब केजीएमयू की कार्रवाई पर नजर

एसटीएफ की रिपोर्ट के बाद शासन ने केजीएमयू प्रशासन से चिह्नित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आगे की प्रक्रिया में विभागीय नियमों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल, यह मामला जांच और संभावित विभागीय कार्रवाई के चरण में है। रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

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