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माओ के बाद ‘सबसे ताकतवर’ हुए शी जिनपिंग

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चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को संविधान में शामिल करने का फ़ैसला किया है. संविधान में शी को चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता और संस्थापक माओत्से तुंग के बराबर दर्जा दिया गया है. 2012 में चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद से शी की चीन की सत्ता पर पकड़ लगातार मजबूत होती गई. संविधान में ‘शी जिनपिंग थॉट’ लिखने के पक्ष में सर्वसम्मति से मतदान किया गया है. कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस के आख़िर में यह फ़ैसला लिया गया. बीज़िंग में बंद दरवाज़े के भीतर इस कांग्रेस में दो हज़ार से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए. यह चीन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक है जिसमें फ़ैसला लिया जाता है कि आने वाले पांच सालों में देश की कमान किसके पास होगी.

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कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस 18 अक्टूबर को शुरू हुई थी. इसकी शुरुआत में शी जिनपिंग ने तीन घंटे का भाषण दिया था. अपने भाषण में शी ने ‘नए युग में चीनी ख़ूबियों के साथ समाजवाद’ दर्शन को पहली बार पेश किया. शी द्वारा इस दर्शन को पार्टी कांग्रेस में रखे जाने के बाद से पार्टी के शीर्ष अधिकारी और मीडिया की तरफ़ से इसका लगातार ज़िक्र किया जा रहा था. इसे शी जिनपिंग थॉट कहा जाने लगा. उसी वक़्त इस बात का संकेत मिल गया था कि शी ने पार्टी में अपना असर छोड़ दिया है. बीबीसी चीन की संपादक कैरी ग्रेसी का कहना है कि पार्टी के संविधान में ‘शी जिनपिंग थॉट’ प्रतिष्ठापित हो जाने का मतलब हुआ कि प्रतिद्वंद्वी अब ताक़तवर शी जिनपिंग को बिना कम्युनिस्ट पार्टी के नियमों का हवाला दिए चुनौती नहीं दे सकते हैं.

इससे पहले भी कॉम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के अपने विचार रहे हैं, लेकिन माओत्से तुंग के अलावा किसी के भी विचार को पार्टी संविधान में थॉट के रूप में जगह नहीं दी गई थी. केवल माओ और देंग ज़ियाओपिंग का नाम पार्टी संविधान में उनके विचार को लेकर शामिल किया गया था. अब स्कूल के बच्चे, कॉलेज स्टूडेंट, सरकारी कर्मचारी नौ करोड़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के साथ शी जिनपिंग थॉट पढ़ेंगे. चीन में शी जिनपिंग थॉट के साथ ही नए तेवर में चीनी समाजवादी युग शुरू हो गया है. पार्टी ने इस नए युग को आधुनिक चीन का तीसरा चैप्टर क़रार दिया है. पहला चरण चेयरमैन माओ का था जिन्होंने गृह युद्ध में फंसे चीन को निकलने के लिए लोगों को एकजुट किया था. दूसरा चरण देंग ज़ियाओपिंग का रहा जिनके शासनकाल में चीन और एकजुट हुआ. ज़ियाओपिंग ने चीन को अनुशासित और विदेशों में मजबूत बनाया. अब तीसरा युग शी जिनपिंग का शुरू हुआ है. अब शी जिनपिंग का नाम पार्टी संविधान में शामिल किया गया है, जिसके बाद से उन्हें कोई चुनौती नहीं दे पाएगा जब तक कि कम्युनिस्ट पार्टी के नियमों पर कोई आंच न आए.

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