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रोजगार की तलाश छोड़ चुके हैं 45 करोड़ से ज्यादा भारतीय

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सीएमआईई यानी ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच कुल श्रम भागीदारी दर 46 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक़ करीब 2.1 करोड़ श्रमिकों ने काम छोड़ा है और मात्र 9 प्रतिशत पात्र आबादी को रोजगार मिला।

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आधी से ज्यादा भारतीय कामकाजी आबादी के काम की उम्मीद छोड़ देने पर अब भारत सरकार ने प्रतिक्रिया दी है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से मंगलवार को कहा कि यह अनुमान लगाना कि कामकाजी उम्र की आधी आबादी ने काम की उम्मीद खो दी है, “तथ्यात्मक रूप से गलत” है। मंत्रालय की ओर से ये भी कहा गया है कि देश में श्रम बल और कार्यबल 2017-18 से 2019-20 के दौरान बढ़े हैं।

साथ ही मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि महिला श्रम बल में भी वृद्धि हुई है। इसके अलावा महिला श्रमिक जनसंख्या अनुपात वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान पुरुष श्रम बल और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में वृद्धि की तुलना में अधिक है।

सीएमआईई की इस रिपोर्ट में यह जानकारी भी दी गई है कि भारत में अभी 90 करोड़ लोग रोजगार के पात्र हैं जिनमें से 45 करोड़ से ज्यादा लोग अब काम की तलाश छोड़ चुके हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पिछले पांच वर्षों में लाखों निराश भारतीयों, जिनमे खासकर महिलायें हैं, ने कम अवसरों के चलते नौकरियों की तलाश बंद कर दी है और श्रम बल को पूरी तरह से छोड़ रहे हैं। इस रिपोर्ट पर मंत्रालय की ओर से आगे कहा गया है कि रोजगार भारत सरकार की प्राथमिक चिंता है और देश में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए मंत्रालयों तथा विभागों द्वारा प्रयत्न किये जा रहे हैं।

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